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Showing posts from December, 2020

मोबाइल ने हमसे क्या छीन लिया? The Untold Reality of Smartphone Use

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मोबाइल ने हमसे क्या छीन लिया? The Untold Reality of Smartphone Use What Did the Mobile Take From Me? – Ek Soch, Ek Sach, Ek Reality Check By Rajan Kumar Aaj ka zamana digital hai. Smartphone hamare haath ka extension ban chuka hai. Subah uthte hi mobile, raat ko sone se pehle bhi mobile. Life easy ho gayi hai, fast ho gayi hai… but ek sawal zaroor uthta hai: “What did the mobile take from me?” Yeh blog ek emotional reflection hai—thoda English, thoda Hindi—kyunki hamari life bhi ab aisi hi ho gayi hai: mixed, fast, aur kahin na kahin disconnected.   1. Bachpan (Childhood) – Lost in Screens Pehle bachpan ka matlab hota tha gully cricket, pakdam-pakdai, cycling, mitti mein khelna. Aaj ke bachche? Mobile screen ke saamne. Cartoons bhi TV pe nahi, YouTube pe. Dost bhi real nahi, online gaming wale. Sach yeh hai: Mobile ne bachpan ki innocence aur outdoor joy chheen li.   2. Sports and Games – मैदान से मोबाइल तक Outdoor sports ka craze kam ho gaya. Cricket, fo...

प्राइवेट नौकरी वाले ने क्या खोया और क्या पाया......

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                                प्राइवेट नौकरी वाले ने  क्या खोया और क्या  पाया......   वर्ष २०२०  बोलने के लिए ठीक रहा क्यों की इस कोविड़ -१९ ने प्राइवेट जॉब करने वाले लोगो का जीने का तरीका बदल दिया !क्यों की साल २०१९ तक जो हमारे रहने का स्टाइल था वो बिलकुल बदल दिया।  हमारा जीने का तरीका बदल दिया... ? ऑफलाइन  से ऑनलाइन पर आगये।   जहा हमलोग महीने का  खर्च पर कोई कंट्रोल नहीं  था  आज कोरोना काल में मजबूर कर दिया की आधे सैलरी पर घर कैसे चलाना है और सिख लिया  ! २०२० सबसे ज्यादा इफ़ेक्ट प्राइवेट नौकरी वालो को इफ़ेक्ट किया....! कई लोगो की  नौकरी गयी , कितनो लोगो को  ५०-७०% सैलरी मिल रही थी।  कई लोगो ने कुछ सगे सम्बन्धियों को खोया कोरोना  की वजह से, कुछ लोगो की शादी रुक गयी, कुछ लोगो का घर टूट गया , कुछ लोगो की सगाई टूट गयी , सेल्स/परफॉरमेंस   का प्रेशर काफी था और है भी  ऐसे कई चैलेंजेस सामने आये लेकिन फिर भी  हम भ...

अब फार्मा मार्केट की सारी उम्मीदे नये साल २०२१ में

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                                  अब फार्मा मार्केट  की सारी  उम्मीदे नये साल २०२१ में  फार्मा सेक्टर के सभी  छोटे बड़े कंपनी जो भी  अपनी टार्गेट राखी थी वो तो कोरोना काल में २०२०-२१  में शायद ही किसी कंपनी को ५ ०% से ज्यादा हुआ होगा? क्यों  मार्केट कंडिशन वैसे ही है।  मार्केट तो ओपन हो गए  है , लेकिन मरीजों  संख्या काफी कम है ! क्यों की अभी भी  मरीज हॉस्पिटल जाने से अवॉयड करते है। और आज इतनी अवेर्नेस है की हर कोई अपनी हेल्थ को लेकर  जागरूक है और अपनी इम्युनिटी बड़ा रहा है। आयुर्वेदिक प्रोडक्ट मार्केट में आज पहले से बेहतर मार्केट तैयार हो गए है।  लोग आज समाचार पत्रों में   विज्ञापन जो आते है काढ़ा , तुलसी ड्रॉप इत्यादि। और इन सभी  चीजों का  ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है।  आज फार्मा में एलोपैथी  सिर्फ कार्डियक प्रोडक्ट रूटीन लगती है तो इनका प्रोडक्ट शुरू है , बाकि गयनेक्लॉजिस्ट  रूटीन फिक्स्ड ब्रांड शुरू...

पुराने तरीके से, नए जमाने में बिजनेस नहीं आएगा.

 पुराने तरीके से, नए जमाने में बिजनेस नहीं आएगा.. आज हमलोग डिजिटल क्रांति की ओर अग्रसर है और हमलोग नये जमाने में 21वी सदी में है और अगर हम 20 साल पुरानी तरीके आज भी अपनाएंगे तो कभी भी बिजनेस नहीं कर सकते! नए जमाने में नए तरीके अपनाओ। आज सब कुछ बदल गया है ,बदलना है तो सिर्फ अपनी सोच पहले बदलो फिर नए नए आइडिया आपको खुद आएंगे। *Successful people don’t let old thoughts crowd out the new ones from their mind* आज के बिजनेस में हर कोई अपना फायदा देखता है और उस फायदे/लालच से कोई बचा नहीं है? आज हमलोग भी देखते है कहा कितना स्कीम/ डिस्काउंट मिल रहा है! तो फिर आपके कस्टमर टारगेटेड जो ग्राहक है उनको भी फायदा दिखाओ आपका बिजनेस जरूर ग्रोथ होगा। आज कोई भी दुकानदार / आपके ग्राहक हो अपना फायदा देखते है कि मुझे क्या मिलेगा इनका प्रोडक्ट से? अगर आप नहीं तो कोई और देगा! क्यू इस देश की आबादी 135 अरब है और हर कोई नया नया आइडिया लाकर बिजनेस ट्रायल लेे रहा है, जिसकी वजह से आपके ग्राहक सोचते है पहले के प्रोडक्ट में कुछ भी नहीं मिलता था? सिर्फ ब्रांड बदला उसको भी फायदा हो रहा है। इस लिए समय के साथ सोच को बद...