21st Century Truth: Distance Between Modernity and Relationships
२१वीं सदी का सच: आधुनिकता के बीच रिश्तों और संस्कारों की दूरी 21st Century Truth: Distance Between Modernity and Relationships आज हम गर्व से कहते हैं कि हम २१वीं सदी में जी रहे हैं। लोग तकनीक की ऊँचाइयों पर पहुँच चुके हैं—सोशल मीडिया, टीवी, मोबाइल हर जगह छा गए हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि नज़दीकियाँ, भावनाएँ और सम्मान अब केवल स्क्रीन पर दिखते हैं, असल ज़िंदगी में कहीं खो गए हैं। पहले के समय में संयुक्त परिवारों में रहना सामान्य था। रिश्तों में ताक़त होती थी, हर सुख-दुख में साथ मिलता था। आज लोग फ्लैट्स में अकेले रहना पसंद करते हैं। शादी के बाद भी लड़के-लड़कियाँ अलग रहने की ज़िद करते हैं। महिलाएँ भी स्वतंत्रता और फैशन के नाम पर छोटे कपड़े पहनना पसंद करती हैं। सोचिए, पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े सस्ते मिलते हैं, और शरीर दिखाने वाले कपड़े महंगे। इससे समझिए कि असली मूर्ख कौन है—खरीदने वाला या बेचने वाला? पहले जब कोई गाँव से शहर जाता था, तो लोग उसे बस या रेलवे स्टेशन तक छोड़ने जाते थे। जब कोई लौटता था, तो उसे लेने पहुँचते थे। आज लोग कहते हैं—“ऑटो या कैब से आ जाओ।” ...