PartuZen: India’s First Dedicated Postpartum Wellness Product

PartuZen: India’s First Dedicated Postpartum Wellness Product Postpartum care has long been overlooked in India, where the focus traditionally remains on pregnancy and childbirth. Recognising this gap, Rajan Kumar designed a unique marketing strategy and scientific literature booklet to introduce PartuZen, the first Indian product dedicated to comprehensive postpartum wellness.   The Vision Behind PartuZen Rajan Kumar understood that women’s recovery after childbirth is not just physical but also emotional and hormonal. His strategy was simple yet powerful: combine scientific credibility with empathetic communication. Instead of presenting the product as just another supplement, he positioned PartuZen as a companion for mothers rediscovering strength.   Marketing Strategy Idea The campaign focused on three pillars:   - Education: Distributing booklets with references from global journals to build trust.   - Empathy: Using visuals of mothers and ba...

मदर डे क्यों मनाते है...?

                                                                   मदर डे क्यों मनाते है...?
आज के दिन हम सभीलोग अपने घरो में  मदर्स डे  मनाते है  ,इस दिन हम सभी लोग घर और सोसाइटी में भी मदर्स डे का कार्यक्रम रखते है। . माँ वह  शक्ति है  जिसका वर्णन कितना भी करो उतना  काम है। माँ और उसके बच्चे का एक अनोखा रिश्ता होता है।  जब एक माँ अपने बच्चे को जन्म देती है , तब वह  कितनी पीड़ा सहती है वह सिर्फ माँ ही समझ सकती है। मदर्स डे  मानाने से अच्छा ,अगर मदर्स को खुश रखो वो ज्यादा अच्छा दिन है। जिस घर में माँ खुश ,उस घर में साक्षात देवी रहती है। भगवान हर एक के पास जा नहीं सकते इसलिए भगवान ने माँ  बनाया है। जो आज सभी के पास है। 
एक माँ के कई रूप होते है , आज भी बच्चे अगर रोते है तो सबसे पहले माँ को ही पुकारते  है, और माँ ही सबसे पहले उस बच्चे को उठाती है अपनी गोद में । . 
एक माँ के कई रूप है जैसे  कभी माँ का, तो कभी पत्नी/बहन/बेटी/बहु /डॉक्टर/ऑफिसर /पुलिस ऐसे कई रूप है।  लेकिन  वह  माँ कभी  थकती नहीं ।  एक  माँ  हर रोज सुबह अपने बच्चे को  स्कूल जाने के   लिए तैयार करती है , और फिर पूरी घर की साफ सफाई करती है, फिर घर के बाकी सदस्यों के लिए भोजन बना कर वह बाद में  ड्यूटी पर भी जाती है और देश की सेवा करती है। ये सिर्फ एक माँ ही कर सकती है। 
मदर्स  डे  कब शुरू  हुआ..... 
मदर्स डे की शुरुवात १९०८ में हुई  और   मॉडर्न हॉलिडे के रूप में १९१४ में मान्यता मिली।   एना जार्विस  ने अपनी माँ की याद में  १९०८ में  ग्राफटन यूनाइटेड स्टेट के एक चर्च में मदर्स डे  मनाया था । इसके लिए उन्होंने  मई का दूसरा रविवार  चुना।  


आज के नए सोशल लाइफ में सिर्फ माँ को ग्रीटिंग /केक/मैसेज  भेज कर मदर्स डे  मनाते है।  बचपन में हम सभी भाई बहन आपस में झगड़ते  थे की यह  मेरी माँ है ये मेरी माँ है... लेकिन जब हम लोग बड़े हो जाते है और शादी हो जाती है तब  हमारे व्यवहार में  बदलाव आ जाता है फिर हम भाई आपस में बोलते है की तुम अपने पास रखो माँ को..  अभी मै  ब्यस्त हु काम में..  ऐसी हालत हो गयी है आज की  युवा पीढ़ी की  , अक्सर देखा जाता  है की उनके बच्चे शहर में रहते है और माँ को गांव में छोड़ देते है... फिर भी माँ हमेशा खुश रहती है , लेकिन कुछ बच्चे इतने मतलबी हो गए है की  अपनी माँ को तब याद  करते है जब उसकी पत्नी गर्ववती हो तब उसकी देख भाल के लिए और फिर उसके बच्चे की देख भाल के लिए!   ऐसा समय आ गया है आज के नए मॉडर्न युग की , हम दूसरे को नहीं बल्कि खुद को धोखा दे रहे है! वह  समय दूर नहीं जब आपके भी बच्चे वही काम करेंगे जो आप करते है? क्यों की बच्चे वही करते है जो आपने माँ-पिताजी को आदर्श को देखते है। 

हैप्पी मदर्स  डे  टू  ऑल  मदर्स 



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